Bulandshahr
हजारों वर्ष से मनाया जाता है श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व
जय श्रीकृष्ण
जन्माष्टमी का पर्व आते ही पूरा देश कृष्णमय हो जाता है। गली-गली, घर-घर और मंदिरों में नन्हे-नन्हे कृष्ण स्वरूप और मंदिरों की भव्य सजावट मानो स्वर्ग का अहसास कराती है।"
छोटे-छोटे बालक जब मोरपंख और बांसुरी धारण कर कृष्ण का रूप धरते हैं, तो ऐसा लगता है मानो खुद नटखट नंदलाला धरती पर उतर आए हों। उनकी मासूम मुस्कान, नन्हे कदम और गालों पर लगी हल्की सी माखन की लकीर हर किसी का मन मोह लेती है।"
"जन्माष्टमी पर मंदिरों में एक अनोखी आभा छा जाती है। झिलमिलाते झालरों से सजे द्वार, रंग-बिरंगे फूलों से सजी झाँकियाँ और चमचमाते दीपक मानो गोलोकधाम की झलक दिखाते हैं। कहीं कृष्ण-राधा की लीलाएँ झाँकियों के रूप में सजाई जाती हैं, तो कहीं बाँसुरी की धुन भक्तों को माधुर्य में डुबो देती है।"
"हजारों श्रद्धालु मंदिरों में एकत्र होकर 'हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की' गाते हुए वातावरण को भक्तिरस से भर देते हैं। घंटियों की गूंज और जयघोष से हर दिल में कृष्ण प्रेम उमड़ पड़ता है।"
जन्माष्टमी सिर्फ एक पर्व नहीं बल्कि यह हमें याद दिलाती है कि जीवन में प्रेम, भक्ति और आनंद का रस घोलना ही श्रीकृष्ण का सच्चा संदेश है। तो आइए, इस जन्माष्टमी पर हम भी उनके नटखट और मधुर स्वरूप को अपने हृदय में बसाएँ।"
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