शिकारपुर की काली गस्त: आस्था, परंपरा और एकता का अद्भुत संगम
शिकारपुर।
नवरात्रि के पावन अवसर पर शिकारपुर की गलियां एक बार फिर आस्था और परंपरा की अनोखी झलक से जगमगा उठीं। हर साल की तरह इस बार भी नगर में निकली काली गस्त ने भक्तिमय माहौल बना दिया।
‘जय काली माँ’ के जयकारों से गूंजती गलियां, हाथों में लहराते झंडे, ढोल-नगाड़ों की थाप पर थिरकते श्रद्धालु — यह दृश्य केवल एक जुलूस नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही आस्था और भाईचारे की मिसाल है।
इस गस्त में हर उम्र के लोग शामिल होते हैं — बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी माँ काली की भक्ति में लीन होकर नगर भ्रमण करते हैं। जब पूरा शहर “जय काली माँ” के जयघोष से गूंज उठता है, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो शिकारपुर स्वयं देवी शक्ति की ऊर्जा से ओतप्रोत हो गया हो।
काली गस्त केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि शिकारपुर की पहचान है — इसकी संस्कृति, एकता और श्रद्धा का प्रतीक।
यह आयोजन वर्षों से समाज को जोड़ने और आस्था को जीवंत रखने का कार्य कर रहा है।
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