Bulandshahr
आखिर क्या है RSS की असली सोच : विचारधारा की जंग या समाज सेवा का संकल्प-सच्चाई क्या है?
देश की राजनीति, समाज और विचारधारा के केंद्र में रहने वाले संगठन 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ' (RSS) की कार्यप्रणाली और उसके उद्देश्यों पर आधारित एक विशेष वैचारिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
जिसमें चर्चा का मुख्य केंद्र बिंदु संघ के प्रति समाज की जिज्ञासा, समर्थन और आलोचनात्मक दृष्टिकोण रहा।
विचारधारा और यथार्थ पर चर्चा
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आरएसएस एक ऐसा नाम है, जिसे सुनते ही देश में चर्चाएं तेज हो जाती हैं। जहाँ एक वर्ग इसे राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव मानता है, वहीं दूसरा वर्ग इसे सवालों और बहस के दायरे में देखता है। इस द्वंद्व के बीच संघ की असली सोच और उसके सामाजिक कार्यों की वास्तविकता को समझना समय की मांग है।
चर्चा में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित टेकचंद शर्मा और संजय शर्मा ने संघ के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला:
संजय शर्मा ने कहा, "संघ केवल एक संगठन नहीं, बल्कि व्यक्ति निर्माण की एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। समाज में समरसता और अनुशासन पैदा करना ही इसका प्राथमिक लक्ष्य है।"
टेकचंद शर्मा ने संघ के सेवा कार्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि आपदा प्रबंधन से लेकर शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में स्वयंसेवकों का योगदान अद्वितीय है, जिसे अक्सर राजनीतिक चश्मे से देखने के कारण नजरअंदाज कर दिया जाता है।
"संघ के प्रति उठने वाले सवाल और जिज्ञासाएं स्वाभाविक हैं, क्योंकि इसकी कार्यशैली प्रचार से अधिक धरातल पर कार्य करने में विश्वास रखती है।" टेकचंद शर्मा ने ज्वलंत सवालों का समाधान करते हुए बड़ी बेबाकी से जवाब दिया
संगोष्ठी में उन ज्वलंत सवालों पर भी चर्चा हुई जो अक्सर सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनते हैं। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि संघ का उद्देश्य सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को बढ़ावा देना है। चर्चा के अंत में यह निष्कर्ष निकला कि संघ की भूमिका को लेकर समाज में चाहे जो भी दृष्टिकोण हो, लेकिन राष्ट्र की प्रगति में इसके योगदान और प्रभाव को नकारा नहीं जा सकता।
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