Bulandshahr
शिक्षा संग संस्कार: नन्हीं डॉक्टर-नर्स बनीं
बुलंदशहर के शिकारपुर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर की अनूठी पहल
शिकारपुर (बुलंदशहर)। सरस्वती विद्या मंदिर कन्या इंटर कॉलेज की छात्राओं ने सेवा और संवेदनशीलता की एक ऐसी मिसाल पेश की, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया। 'बालिका शिक्षा एवं सरस्वती यात्रा' के तहत विद्यालय की छात्राओं ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक विशेष सेवा और जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया।
मरीजों के दर्द को बांटने पहुंची 'नन्ही डॉक्टर'
अस्पताल के गलियारों में जब स्कूली छात्राएं डॉक्टर और नर्स की वेशभूषा में मरीजों का हाल जानने पहुंचीं, तो वहां का दृश्य बदल गया। कक्षा 8 की छात्रा आरवी ने डॉक्टर की भूमिका में मरीजों का उपचार देखा, जबकि अन्य छात्राओं ने नर्स बनकर मरीजों की सेवा की। छात्राओं ने वार्ड में भर्ती मरीजों के पास जाकर न केवल उनका कुशल-क्षेम पूछा, बल्कि उन्हें फल, बिस्किट और अन्य सामग्री भी वितरित की।
मरीजों ने भावुक होते हुए कहा कि इन बेटियों के आने से उन्हें जो मानसिक संबल मिला, वह किसी दवा से कम नहीं है। परिजनों ने भी विद्यालय की इस पहल को सराहते हुए कहा कि ऐसे संस्कार ही आज के समय की वास्तविक शिक्षा है।
किताबों से बाहर निकली शिक्षा
विद्यालय के प्रबंधक अनिल कुमार मित्तल ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल बेहतर अंक लाना ही नहीं है, बल्कि बच्चों को समाज के प्रति जिम्मेदार बनाना है। प्राचार्या श्रीमती निशा गुप्ता और कॉर्डिनेटर श्रीमती निधि गुप्ता ने संयुक्त रूप से बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को स्वास्थ्य प्रणाली की कार्यप्रणाली समझाना और उनमें मानवता का बोध कराना था।
समाज में चर्चा का विषय
यह कार्यक्रम शहर में चर्चा का केंद्र रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि किताबी ज्ञान से भविष्य बनता है, लेकिन सेवा और परोपकार के संस्कार एक बेहतर समाज का निर्माण करते हैं। सरस्वती विद्या मंदिर की इस पहल ने संदेश दिया है कि आने वाली पीढ़ी न केवल अपने सपनों को उड़ान देने के लिए, बल्कि राष्ट्र सेवा के लिए भी पूरी तरह तैयार है।
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